July 10, 2020

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‘कोरोनिल’ को लेकर योगगुरू बाबा रामदेव और आचार्य बालकृष्ण ने पत्रकारों से की बातचीत

‘कोरोनिल’ को लेकर योगगुरू बाबा रामदेव और आचार्य बालकृष्ण ने पत्रकारों से की बातचीत
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हरिद्वार स्थित पतंजलि योगपीठ में ‘कोरोनिल’ को लेकर योगगुरू बाबा रामदेव और आचार्य बालकृष्ण ने पत्रकारों से बातचीत की। इस दौरान बाबा रामदेव ने कहा क्लीनिकल कंट्रोल ट्रायल की पूरी रिसर्च आयुर्वेद विभाग को भेजी है, जो पैरामीटर बनाए गए हैं, उसके अनुरूप ही ये रिसर्च की गई है। उन्होंने कहा कि आयुर्वेद बीमारियों को जड़ से खत्म करने की प्रक्रिया है। हमने योग और आयुर्वेद के माध्यम से लोगों को स्वस्थ होने की शिक्षा दी है, लेकिन फिर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। आयुष मंत्रालय ने भी कहा है कि पतंजलि ने कोविड के क्षेत्र में अच्छी पहल की है। इससे सभी विरोधियों के मंसूबों पर पानी फिर गया है।

योगगुरु बाबा रामदेव ने बुधवार को कोरोनिल को लेकर सफाई दी। साथ ही इसको लेकर चल रहे विवाद के बीच विरोधियों पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि योग और आयुर्वेद का काम करना मानों गुनाह हो गया है। जैसे देशद्रोही और आतंकवादियों के खिलाफ एफआइआर होती है। वैसे ही हमारे खिलाफ भी की जा रही है। उन्होंने सवाल किया कि आखिर कोरोना को लेकर क्लीनिकल ट्रायल पर तूफान क्यों खड़ा कर दिया गया है।

आयुष मंत्रालय ने भी माना, कोविड मैनेजमेंट पर किया काम 

उन्होंने कहा कि आयुष मंत्रालय ने भी माना है कि कोविड मैनेजमेंट पर हमने काम किया है। अभी तक जो कार्य किए गए, वो आगे भी जारी रहेंगे। उन्होंने बताया कि कोरोनिल के लिए गिलोय, अश्वगंधा तुलसी का सुनिश्चित कंपाउंड लिया गया। इनकी सुनिश्चित मात्रा के तत्वों को लेकर कोरोनिल तैयार की गई है। इसी तरह दालचीनी और अन्य से श्वासारी वटी को तैयार किया गया। इनके लाइसेंस अलग-अलग हैं, पर इनका एकसाथ प्रयोग किया गया। इनपर संयुक्त रूप से ट्रायल हुआ है। हालांकि, इनका रजिस्ट्रेशन और रिसर्च के प्रोसेज अलग-अलग हैं। हमने मॉर्डन मेडिकल साइंस के तहत ये काम किया गया है।

आयुर्वेद के परंपरागत गुणों पर लिया लाइसेंस 

बाबा रामदेव का ये भी कहना है कि हमने जो तीन औषधियां बनाई हैं, उनका लाइसेंस यूनानी और आयुर्वेद मंत्रालय से लिया गया है। कुछ लोग सवाल कर रहे हैं कि रिसर्च किस पर कर रहे हैं। इसका जवाब ये है कि आयुर्वेद में औषधियों के परंपरागत गुणों की रिसर्च पर लाइसेंस मिलता है। हमने परंपरागत गुणों के आधार पर लाइसेंस लिया है।

पांच सौ वैज्ञानिकों की टीम कर रही काम 

उन्होंने कहा कि अभी कोरोना के ऊपर क्लीनिकल ट्रायल हुआ है। दस से ज्यादा बीमारियों के तीन लेवल को हम पार कर चुके हैं। हृदय रोगियों, अस्थमा, हाइपेटाइटिस, डेंगू, चीकनगुनिया के रोगियों पर रिसर्च कर चुके हैं। पांच सौ से ज्यादा वैज्ञानिक हमारी रिसर्च टीम में शामिल हैं। आज पूरी साम्राज्यवादी सोच पर हमला किया गया है। हमने योग और रिसर्च पर दस हजार करोड़ का ढांचा बना दिया हमने। हमने क्लीनिकल कंट्रोल ट्रायल की पूरी रिसर्च आयुर्वेद विभाग को भेजी है, जो पैरामीटर बनाए गए हैं, उसके अनुरूप ही ये रिसर्च की गई है। हमने मरीजों पर ट्रायल करके देखा, सभी चीजें कंट्रोल हो रही हैं। उन्होंने ये भी कहा कि पतंजलि ने करोड़ों लोगों को आयुर्वेद और योग के माध्यम से नया जीवन दिया है।

रोगमुक्ति के खिलाफ जारी रहेगा अभियान  

बाबा रामदेव ने दावा किया कि हमने हैपेटाइटिस को भी नेगेटिव किया है। उस पर भी एफआइआर दर्ज करो। इससे हमें कोई फर्क नहीं पड़ता है। जो आजतक दुनिया में नहीं हुआ है वो योग ने कर दिखाया है। लाखों लोगों का बीपी योग से ही ठीक हुआ है। इसके लिए दवा लेने की जरूरत ही नहीं पड़ी। योग के द्वारा, अस्थमा, बीपी ठीक हुआ है। अगर इसे कोई गुनाह कहे तो हम इसके लिए भी तैयार हैं, लेकिन रोगमुक्ति के खिलाफ अभियान जारी रहेगा।

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