July 09, 2020

Breaking News

नेताजी सुभाष चंद्र बोस की बेटी और उनका परिवार उनकी अस्थियों की चाहता है डीएनए जांच

नेताजी सुभाष चंद्र बोस की बेटी और उनका परिवार उनकी अस्थियों की चाहता है डीएनए जांच
Want create site? Find Free WordPress Themes and plugins.

नेताजी सुभाष चंद्र बोस की बेटी और उनके परिवार का एक हिस्सा पिछले कुछ सालों से लगातार जापान के रैंकोजी मंदिर में रखी उनकी अस्थियों की डीएनए जांच की मांग करते हैं. इससे पता चल जाएगा कि ये अस्थियां नेताजी की ही हैं या नहीं. ये जांच नेताजी को लेकर बरसों से उनके निधन को लेकर चल रही रहस्यगाथा का भी पटाक्षेप कर देगी।

क्यों सुभाष चंद्र बोस का परिवार चाहता है जापान में रखी उनकी अस्थियों का डी एन ए टेस्ट?

नेताजी सुभाष चंद्र बोस के पोते चंद्रकुमार बोस ने फिर कहा है कि टोक्यो के रैंकोजी मंदिर में रखी अस्थियों का डीएनए टेस्ट कराया जाना चाहिए ताकि नेताजी के निधन को लेकर बने रहस्य पर पूर्ण विराम लगाया जा सके. उनका कहना है अगले साल जापान के प्रधानमंत्री शिंजो आबे भारत की यात्रा पर आ रहे हैं. उस समय भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को उनके सामने इस मामले को रखना चाहिए।

केंद्र सरकार अब तक नेताजी से संबंधित करीब 300 फाइलों को क्लासीफाइड कर चुकी है, लेकिन इसके बावजूद ये पता नहीं चलता कि 18 अगस्त 1945 को तायहोकु में हुए हवाई हादसे के बाद क्या वाकई वो जिंदा थे. भारत में इसकी जांच को लेकर तीन आयोग बन चुके हैं। पहले दो आयोगों का कहना है कि नेताजी का निधन 18 अगस्त 1945 को ताइवान के तायहोकु एयरपोर्ट पर हो चुका है,लेकिन सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस मनोज मुखर्जी जांच आयोग ने इससे एकदम उलट रिपोर्ट दी उसके बाद से ही नेताजी की जापान के मंदिर में रखी अस्थियों की डीएनए जांच का मुद्दा तूल पकड़ता रहा है।

मुखर्जी आयोग ने अपनी रिपोर्ट में लिखा कि नेताजी का निधन तायहोकु में 18 अगस्त 1945 में नहीं हुआ था।आयोग ने रैंकोजी मंदिर में रखी अस्थियों को किसी अन्य ताइवानी सैनिक की अस्थियां बताया था।
हालांकि नेताजी सुभाष चंद्र बोस का परिवार उनके निधन के तथ्य को लेकर बंटा हुआ है। सुभाष के बड़े भाई शरत बोस नहीं मानते थे कि उनके भाई का निधन हो चुका है. पहली बार गठित किए गए शाहनवाज खान जांच आयोग में सुभाष के बड़े भाई शरत चंद्र बोस को शामिल किया गया था लेकिन उन्होंने भी शाहनवाज कमीशन की रिपोर्ट से असहमति जताकर अपनी अलग रिपोर्ट जारी की थी।

उन्होंने भी कहा था कि सुभाष का निधन तायहोकु में विमान हादसे में नहीं हुआ. लेकिन शरत के बेटे शिशिर की पत्नी कृष्णा बोस का कहना है कि उन्हें जो जानकारी है, उसके अनुसार नेताजी का निधन उसी हादसे में हो चुका है। चंद्र कुमार बोस नेताजी के पोते हैं, वो शरत चंद्र बोस के सबसे बड़े बेटे अमीय नाथ बोस की संतान हैं।अमीय ने भी कभी नहीं माना कि नेताजी उस हादसे में मरे है।यही बात बीजेपी के टिकट पर बंगाल से लोकसभा का चुनाव लड़ चुके चंद्रकुमार भी मानते हैं।

चंद्र कुमार कई बार ये मांग कर चुके हैं कि अब समय आ गया है कि नेताजी की अस्थियों की जांच कराकर पूरे मामले का पटाक्षेप कर दिया जाए। इस मामले में नेताजी की बेटी अनीता बोस फाफ भी उनसे सहमत हैं।
सुभाष चंद्र बोस की बेटी अनीता बोस फोफ अब 78 साल की हैं।जर्मनी में रहती हैं,हालांकि अनीता ने हमेशा कहा कि उनके पास ऐसी कोई जानकारी या सूचना नहीं है कि उनके पिता विमान हादसे के बाद जिंदा थे।वो उन्हें मृत ही मानती हैं लेकिन वो भी चाहती हैं कि जापान के जिस मंदिर में उनके पिता की अस्थियां रखी हैं, उसका डीएनए टेस्ट कराकर उन्हें भारत लाया जाए। अगर ये अस्थियां उनके पिता की हैं तो वो गंगा नदी में इसका तर्पण करना चाहेंगी ताकि पिता की आत्मा को शांति मिले।

दरअसल 1941 के आसपास सुभाष चंद्र बोस ने जर्मनी में अपनी स्टेनो रहीं एमिली शेंकल से गुप्त तौर पर शादी कर ली थी।जिनसे अनीता का जन्म हुआ। अनीता अब 78 साल की हो रही हैं और जर्मनी में अपने पति के साथ रहती हैं। वो कई बार भारत आ चुकी हैं।
अनीता कई सालों से मांग कर रही हैं कि टोक्यो में नेताजी की जो अस्थियां मंदिर में रखी हैं, उनका डीएनए टेस्ट कराया जाए, ताकि सच्चाई सामने आए और नेताजी की आत्मा को शांति प्रदान की जा सके।

कई सालों से हो रही है डीएनए टेस्ट की मांग
कई सालों से टोक्यो के मंदिर में रखी सुभाष की अस्थियों की डीएनए जांच की मांग होती रही है लेकिन भारत सरकार ने खुद को इससे परे रखा है. इसके चलते सुभाष को लेकर रहस्य लगातार बढ़ा ही है. अगर डीएनए जांच में ये साबित हो गया कि ये अस्थियां नेताजी की थीं तो 74 सालों से चल रही इन अटकलों पर भी खुद ब खुद फुलस्टॉप लग जाएगा कि नेताजी की मृत्यु कैसे हुई थी.
अगर डीएनए जांच में ये साबित नहीं होता तो नेताजी से जुड़ी फाइलों को खोलने में सही दिशा में बढ़ा जा सकता है. लिहाजा मौजूदा समय का उत्तर यही है कि ऐसा होना चाहिए।

ये टोक्यो के रैंकोजी मंदिर जहां नेताजी की अस्थियां रखी हैं. हालांकि लोगों में इसे बात पर मतभेद है कि वास्तव में इन अस्थियों का संबंध नेताजी से है या नहीं
तीन जांच आयोग
सुभाष चंद्र बोस देश में एक रहस्यपूर्ण किवंदती बन चुके हैं. जिनके निधन या जिंदा रहने को लेकर ना जाने कितनी बातें कही जाती रही हैं। इसकी जांच को लेकर तीन जांच आयोगों का गठन हुआ। दो आयोग कांग्रेस सरकारों के कार्यकाल में बने और एक जस्टिस मनोज मुखर्जी आयोग का गठन 1999 में तत्कालीन प्रधानमंत्री अटलबिहारी वाजपेयी ने किया था. पहले दो आयोगों का मानना था कि बोस का निधन हवाई हादसे में हुआ। जबकि तीसरे आयोग ने इससे साफ इनकार कर दिया. मुखर्जी आयोग ने तो टोक्यो के मंदिर में रखी अस्थियों पर ही सवाल उठा दिया।

अस्थियों के टोक्यो तक पहुंचने की कहानी

बोस की अस्थियों के तायहोकू के हवाई दुर्घटना हादसा स्थल से टोक्यो पहुंचने की भी एक कहानी है. अगर शाहनवाज रिपोर्ट की बात करें तो इसके अनुसार, 20 अगस्त को तायहोकू के होंगाजी मंदिर के पीछे पूरे सैन्य सम्मान के बीच नेताजी का अंतिम संस्कार किया गया. ये काम मंदिर के बौद्ध पुजारी की देखरेख में हुआ. अगले दिन शवदाह गृह से अस्थियां एक लकड़ी के बॉक्स में इकट्ठी की गईं।
रिपोर्ट कहती है कि एक फुट क्यूबिक के इस लकड़ी के बॉक्स को सफेद कपड़े में लपेट कर एक हफ्ते तक वहीं मंदिर में रखा गया।

फिर इसे विमान और रेल मार्ग के जरिए टोक्यो पहुंचाया गया। जब अस्थियां टोक्यो पहुंचीं तो एक जुलूस निकालकर और धार्मिक संस्कारों के बीच इसे रैंकोजी मंदिर में स्थापित कर दिया गया. तब ये अस्थियां उसी मंदिर में हैं।
सुभाष चंद्र बोस के निधन के रहस्य की जांच के लिए तीन आयोग बन चुके हैं, लेकिन उनमें से हर की रिपोर्ट विवादों में ज्यादा रही है।

भारत सरकार ने अब तक नहीं माना है मृत

इन अस्थियों को कई बार भारत में लाने की मांग होती रही हैं. लेकिन वैधानिक दिक्कत ये भी है कि भारत सरकार ने अब तक नेताजी सुभाष को मृत नहीं माना है. नेताजी की बेटी को लगता है कि पिछली सरकारों को कुछ ऐसे लोग थे जो नेताजी को लेकर कभी हल तलाशना ही नहीं चाहते थे।वो चाहते थे कि ये रहस्य बना रहे। लिहाजा अब फिर नेताजी की अस्थियों की डीएनए जांच की मांग जोर पकड़ रही है। ये कहा जा रहा है कि ये जांच कराने के बाद ही नतीजे के आधार पर भारत सरकार नेताजी के बारे में आधिकारिक स्थिति स्पष्ट करे. इसके बाद अस्थियों को भारत लाया जाए।

 

 

Newsexpress100 देश की प्रतिष्ठित मीडियापोर्टल की हिंदी वेबसाइट है।www.newsexpress100.com में हमें आपकी राय और सुझावों की जरुरत हैं। आप अपनी राय, सुझाव और ख़बरें हमें newsexpress100tv@gmail.com या vikas.gargddn@gmail.comपर भेज सकते हैं या हमारे व्हाटसप नंबर 9760620131 (संपादक विकास गर्ग) पर भी संपर्क कर सकते हैं।

Did you find apk for android? You can find new Free Android Games and apps.

About The Author

Related posts

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *